क्या ट्विटर विज्ञपनों से घृणा करता है

मई 24, 2009

जब हम सार्वजनिक रूप से इस  बारे में बात करते है कि ट्विटर कैसे एक लाभदायक व्यवसाय बन सकता है, तब हम ट्विटर के वाणिज्यिक उपयोग की संकल्पनाओ के बारे में बात करते है और फिर इस बात को समझाने की कोशिश करते है कि हम अभी भी ट्विटर का वाणिज्यिक उपयोग का मतलब ढूंढ रहे हैं और यह सच है।  हम यह भी कहते है कि पारंपरिक वेब बैनर विज्ञापन मे हमे दिलचस्पी नहीं है. हालांकि, यह कहना गलत होगा कि ट्विटर  किसी भी और सभी प्रकार के विज्ञापनों का तात्विक रूप से विरोध करता हैं।
एक लंबे अर्से से, हमने कहा  है कि हमे ट्विटर के वाणिज्यिक उपयोग के बारे मे कई दिलचस्प संभावनाये नजर आ रही है। व्यवसायों और व्यक्तियों को ट्विटर से मूल्यवृद्धी प्राप्त हो रही है और हम उसमें विस्तार करने में सक्षम हो सकते है।  हमने अभी इस क्षेत्र में तलाश शुरू कर दी है और प्रारम्भिक विचारों मे, खाता प्रमाणीकरण, प्रबंधन उपकरण है, और खोज तंत्र शामिल हैं। हम आपको सूचित करते रहेंगे।
हमेशा से राजस्व उत्पन्न करने के लिए ट्विटर.कॉम पर परम्परागत बैनर विज्ञापनों को चलाने के लिए पैसे लेने की संकल्पना हमे कभी भी अधिक नही भायी। हालांकि, कारोबार और व्यक्तियों के बीच सार्थक और प्रासंगिक तरीकों से सहसम्बन्ध स्थापित करने की सुविधा प्रदान करने मे हम कटिबद्ध हैं।इस क्षेत्र में अन्वेषण के द्वार हम खुले रखने जा रहे है।
क्या हम विज्ञापनों से नफरत करते हैं ?नही, बिल्कुल नहीं। यह एक बहुत बड़ा उद्योग है जो रचनात्मकता और प्रेरणा से भरा है। विज्ञापन, विपणन और जनसम्पर्क क्षेत्र में नई नवीनताओं के सृजन के अनेक अवसर हैं, और ट्विटर पहले से ही इस बात का एक अंश बन चुका है। वास्तव में, अगले महीने मैं  ५६वे अन्तरराष्ट्रीय वार्षिक विज्ञापन उत्सव कान शेरों 2009. मै शामिल हो रहा हूं और अपने विचार भी प्रस्तुत करने जा रहा हूं। मैं आपकों वहा की घटनाऒं से अवगत करा दूंगा।.
ट्विटर ब्लॉग के इस पन्ने का गूगल अनुवादक के सहायता से किया हुआ रूपान्तर प्रयास

ब्लॉग से पैसा कैसे कमाये

मई 23, 2009

ब्लॉग से पैसा कमाना आसान है। ब्लॉग से पैसा कमाने के बहुत अनुप्रयोग,संलग्न मौजूद है और ये बहुत आसान है।

ब्लॉग क्या है?
ब्लॉग एक व्यक्तिगत स्थान या यों कहिये एक व्यक्तिगत डायरी है। फर्क इतना है इसे कोई भी खोल सकता है, पढ सकता है, और अपनी टिप्पणी भी दे सकता है। ब्लॉग के कई प्रकार होते है। कुछ तो व्यापारी ब्लॉग होते है तो कुछ सोशल नेटवर्किंग । कुछ व्यक्तिगत होते है तो कुछ व्यावसायिक । लेकीन अधिकांश ब्लॉग किसी थीम पर आधारित होते है जिससे ब्लॉग पर कौन से विषय लिखे जाने वाले है, इसका वाचक को ज्ञान हो सके । ब्लॉग बनाना इतना आसान है कि एक छोटा बच्चा भी अपना ब्लॉग बना सकता है ।

ब्लॉग के प्रकार
टिप्पणी ब्लॉग वे होते है जो लेखक के जीवन मे हुयी घटनाऒं, अनुभवो पर मत प्रदर्शित करते है। इनमे कोई विषय या घटना ली जाती है जिसमे पाठको की विशेष रुची हो और लेखक अपने विचार, भावनाओ को प्रगट करत है। समाचार पत्रों मे जिस तरह कोई संपादकीय छापा जाता है उसी तरह लेखक अपना नजरिया प्रस्तुत करने का प्रयत्न करता है। इनमे समाचार एवं मतो का , दोनो का आवोर्भाव होता है ये कहने की जरूरत नही है। ब्लॉग लेखकों के हाथ मे ऐसा उपकरण जिसकी सहायता से वे एक दुसरे के सम्पर्क मे रह सकते है और दुनिया को उनके जीवन मे क्या हो रहा है इससे परिचय करा सकते है। अभी हाल मे, जिन देशों मे सत्ता-परिवर्तन हुआ है, वहा पर पारम्परिक माद्यमो के अभाव मे ब्लॉगकारोंने ही दुनिया को वहा क्या हो रहा है इस सम्बन्ध मे जानकारी दी है।

दुसरे पकार का ब्लॉग होता है छटनी ब्लॉग। ये टिप्पणी ब्लॉगो की ही तरह होते है, फर्क इतना है इनमे कडियां अधिक दी जाती है। इन ब्लॉगो मे सामग्री कम दी जाती है और अधिक सामग्री इंटरनेट पर जहा मौजूद है वहा पर जाने के लिये पाठको को कडिया दी जाती है। इन ब्लॉग के मालिक को लिंक प्रदान करने के लिये थोडी बहुत फीस रुपये कमाई हो जाती है।
आप इन दोनो ही प्रकारों मे से किसी एक प्रकार का चुनाव कर सकते है। अधिकांश ब्लॉगर प्लॅटफार्म जैसे की ब्लॉगर और वर्डप्रेस लेखकों को ब्लॉगिंग की सुविधा निःशुल्क प्रदान करते है और आप इन स्थानको पर बहुत ही आसानीसे कुछ ही चरणों मे ब्लॉग बनाकर अच्छी कमाई कर सकते हो।

ब्लॉग कैसे बनाये
ब्लॉगर और बर्डप्रेस पर ब्लॉग बनाना बहुत ही आसान है। इनके अलावा टाईपपॅड और मायक्रोसॉफ्टनेटवर्क के लाईव.कॉम भी अन्य महत्त्वपूर्ण स्थानक है। कुछ ही क्लिकों मे आप एक शानदार ब्लॉग बना सकते हैं। आप जिस थीम पर अपने ब्लॉग को आधारित करना चाह्ते हैं उसके अनुरूप अपने ब्लॉग कोई नाम चुने जिसे खोज यंत्रों को अपने परिणामों मे दिखाने मे सुलभता हो, और जिससे सर्च इंजिने के वरिष्टताक्रम मे आप उपर जा सके।उदाहरण के लिये यदि मोबाईल ब्लॉगिंग इस विषय पर अपना ब्लॉग केन्द्रित करना चाहते हैं तो तो “मोबाईल-ब्लॉगिंग” यह नाम चुनें। दोनो शब्दो को एक मे न मिलाये। अर्थात मोबाईलब्लॉगिंग.ब्लॉगस्पॉट.कॉम ऐसा नाम मत चुनिये। शोध-यंत्रो का आपका ब्लॉग ढूंढना आसान बनाना चाहते हैं तो “मोबाईल-ब्लॉगिंग.ब्लॉग्स्पॉट.कॉम ऐसा नाम रखिये।

आपके ब्लॉग का प्रचार-प्रसार कैसे करें
आप ब्लॉग से पैसा कमाने के लिये आपके ब्लॉग के बारे मे जानकारी प्रमुख खोज-यंत्रों को प्रदान करें। धीरे-धीरे आपके ब्लॉग पर ट्रॅफिक बनता जायेगा और आपके ब्लॉग पर आने वाले अतिथियों की गणना के लिये आप गणक भी लगा सकते हैं। आप अपने मित्रों को और उनके मित्रों को ई-मेल द्वारा कडियां भेज सकते है और अपने लेखक मित्रों को उनके ब्लॉग पर आपके लिये एक कडी बनाने का अनुरोध कर सकते हैं। आजकल तो आप अपने ट्वीटर एकाउंट से अपने सभी पिठ्ठुऒं को अपने हर लेख चपने की सूचना ट्वीट कर सकते है।जैसे जैसे आपके ब्लॉग पर लाने वाली कडियां बढती जायेंगी वैसे आपकी लोकप्रियता और सर्च-यंत्रो के पृष्टों पर आपकी वरीयता बढती जायेगी। आप दिन मे बार-बार नये पोस्ट लिखते जाइये और आपके ब्लॉग के प्रचार-प्रसार के काम कोई ढिलाई न बरते।

एफिलिएट प्रोग्राम के लिये आवेदन करे
जब आपके ब्लॉग पर पर्यटको का आना हरदिन लगातार बढता जायेगा आप ब्लॉग से पैसा कमाने की ताक मे लगना शुरु कर सकते है। पहले उन एफिलिएट प्रोग्रामो के बारे में सोचे जो उनके विज्ञापन आपके ब्लॉग पर चिपकाने के ऐवज मे आपको पैसा देते हैं। उनके साईट पर अपना नाम रजिस्टर कराने के बाद अनका कोड अपने ब्लॉग पर उचित जगह पर कापी-पेस्ट करे। बहुत से एफिलिएट अनुप्रयोग आपको हर क्लिक पर कुछ पैसे देते है या कुछ उन क्लिकॊं से आये ग्राहकों ने कुछ क्रय किया हो तो क्रय-मूल्य के अनुपात मे पैसा देते है।अतः अपने एफिलिएट अनुप्रयोगों का चुनाव बुद्धिमत्त्तापूर्वक करे।

गूगल एड्सेन्स के साथ रजिस्टर करे
गुगल जिस विज्ञापन अनुप्रयोग से संकेतस्थलों और् चिठ्ठों पर अपने ईश्तेहार चलाती है उसका नाम है एडसेन्स जब गुगल के एड-सेन्स खाते मे अपना नाम दर्ज कराते हैं तो गूगल आपको एक कोड देगा जिसे आपको अपने चिठ्ठों पर चिपकाना होगा । जब आप ऐसा कर लेते है तो आपक्को गूगल के एक दुसरे उत्पाद् जिसका नाम उन्होने गूगल एनालिटिक्स अर्थात गूगल विश्लेषक रक्खा है उसका उसका उपयोग करना पडेगा। वहा पर जाकर अपना नाम दर्ज कीजिये। गूगल विश्लेशक आपके ब्लॉग के परफार्मन्स पर नजर रखेगा और आपके स्थल पर विश्व के किस भाग से कितने लोग आये।
निराश मत होईये। जैसे जैसे आपके ब्लॉग पर आवागमन मे वॄद्धी होती जायेगी आपकी लोकप्रियता और खोज-पृष्टों पर आपकी वरीयता बढती जायेगी। जितना आपका ब्लॉग जनप्रिय होता जायेगा उतनी आपकी आमदनी भी बढती जायेगी।

कुछ अन्य एफिलिएट अनुप्रयोगों की कडिया नीचे द्दी गई हैं।
गूगल एडसेन्स
अमेझन
रजिस्टर
जीटूबक्स
ई-बे
यह लेख मूल रूप मे अंग्रेजी भाषामे लिखा गया है जिसे आप यहा पर पढें।

मार्केटिंग करना बहुत खर्चीला है

मई 23, 2009

भावी ग्राहकों से तत्पर एवं प्रभावी सम्पर्क
यदि आप पत्र द्वारा अपने उत्पाद या सेवा के बारे में जानकारी, अपने भावी ग्राहकों तक पहुचाना चाहते हैं, तो कम से कम ए-४ साईज के पन्ने पर ४-रंगी आफसेट छपाई, वह भी १७० ग्राम्/वर्गमीटर के कागज पर करना जरूरी है। ५,००० प्रतियां, नही नही १०,००० छापो ।आपने छपाई कराली और आपका विज्ञापन पत्र लिफाफों भर दिया, जिसे अब डाक द्वारा भेजा जाना हैं, तो आपने अबतक एक लाख रुपये डिजाईन एजन्सी और मुद्रणालय पर खर्च कर डाले होंगे।पता चिपकाने के लिये लेबल की छपाई और लिफाफों पर पेस्टिंग के लिये और २०,००० रुपये तयार रखिये और टिकिटों के लिये ४०,००० रुपये उपर से अलग ।
चलो आपने विज्ञापन ग्राहको को भेज भी दिया ।
करीब २० प्रतिशत पत्र अपने गंतव्य स्थान तक पहुचते ही नही ।(आपको गलत पते मिले थे।) ३० प्रतिशत तो बिना पढे ही रद्दी के टोकरीमे पहुंच जाते हैं। और बाकी बचे हुये लिफाफा खोलने के बाद एक मिनिट के पूर्व ही डिसकार्ड कर दिये जाते है। ठीक है सब के सब नही, लेकिन आपको नजारा तो आ गया हो गया होगा ।
यह प्रक्रिया कितने बार होती है? लगभग हर महिने या साल मे एक बार।
ई-पत्र का मार्ग अपनाईये
कुछ वर्ष पुर्व हम ई-मेल और डेटाबेस की संभावनाओं की तरफ जागृत हुये। खर्च मे बचत की दृष्टीसे  पर्याय बहुत ही आकर्षक था । डिजाईन के खर्चे मे भले ही कोई बचत न हुयी हो, लेकिन चपाई तो मुफ्त और डिलेवरीका खर्च ५० पैसे प्रति पत्र । जैसे डाक द्वारा प्रचार के खर्च का अनुमान हमने उपर निकाला, ठीक उसी तरह ई-मेल का अनुमानित व्यय लगभग दस प्रतिशत ही निकलता है। अहो आश्चर्यम् और आपके दिल की धडकन भी तेज नही होती।
खर्च मे बचत के अलावा आपको और अधिक जानकारी मिलने लगी, कितने लोगोने आपका ई-मेल खोला, कितनोंने पत्रमे ग्रंथित कडियों पर क्लिक किया और किसने आपका पत्र खोले बिना खोले, बिना पढे ही इन्बॉक्स से निकाल दिया । अब आप जानते हैं किस-किस का ई-मेल पता गलत है। जिन ग्राहकोने किसी विषय मे रूचि दिखाई है उनसे आप संवाद/सम्पर्क साध सकते हैं। कोई ग्राहक सचमुच आपकी सेवाऒं/उत्पादों मे अगर बिलकुल ही रुचि नही रखता(बन्दर क्या जाने अद्रक का स्वाद) तो आप अपनी मेलिंग लिस्टसे उसे हटा भी सकते हैं।
लेकिन सस्ते तकनीकी उपायों के धडाधड उपयोग करने से अपने आपको बचाईये
तन्त्रज्ञान अच्छा है। लेकिन हम मनष्यों के साथ व्यवहार करते है। अगर आपके पहलेसे भरे हुये इन्बॉक्समे रोज एक रिमाइंडर मै भेजने लगूं तो आपके मन मे मेरे प्रति चीड उत्पन्न होना स्वाभाविक ही है । जितना हो सके ग्राहक को कम से कम तकलीफ हो यह देखना जरूरी है । हॅमरिंग से होने वाला नुकसान तन्त्रज्ञानसे होने वाले फायदे से कही जादा न हो जाये।
क्या कहना है और किसे कहना है यह ज्ञान अत्यावश्यक है

वाणिज्य संचार के मूलभूत तत्त्वों में नये तन्त्रज्ञान से कुछ बदलाव नही आया है. आप किससे सम्पर्क कर रहे हैं और उसकी क्या जरूरत है माद्यम पर नही निर्भर करता। सरल भाषा मे सीधे-सीधे अपनी बात सामने वाले को प्रभावित करती है। लेकिन आजकल अक्सर देखा यह जा रहा है कि जितना घुमाकर संदेश भेजे जा रहे  हैं और् जितना पॉश दिखाने की कोशीश की जा रही है, उतनी ही संदेश की परिणामकारकता कम होते जा रही है|
अंग्रजीसे अनुवादित

Hello world!

मई 23, 2009

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