भावी ग्राहकों से तत्पर एवं प्रभावी सम्पर्क
यदि आप पत्र द्वारा अपने उत्पाद या सेवा के बारे में जानकारी, अपने भावी ग्राहकों तक पहुचाना चाहते हैं, तो कम से कम ए-४ साईज के पन्ने पर ४-रंगी आफसेट छपाई, वह भी १७० ग्राम्/वर्गमीटर के कागज पर करना जरूरी है। ५,००० प्रतियां, नही नही १०,००० छापो ।आपने छपाई कराली और आपका विज्ञापन पत्र लिफाफों भर दिया, जिसे अब डाक द्वारा भेजा जाना हैं, तो आपने अबतक एक लाख रुपये डिजाईन एजन्सी और मुद्रणालय पर खर्च कर डाले होंगे।पता चिपकाने के लिये लेबल की छपाई और लिफाफों पर पेस्टिंग के लिये और २०,००० रुपये तयार रखिये और टिकिटों के लिये ४०,००० रुपये उपर से अलग ।
चलो आपने विज्ञापन ग्राहको को भेज भी दिया ।
करीब २० प्रतिशत पत्र अपने गंतव्य स्थान तक पहुचते ही नही ।(आपको गलत पते मिले थे।) ३० प्रतिशत तो बिना पढे ही रद्दी के टोकरीमे पहुंच जाते हैं। और बाकी बचे हुये लिफाफा खोलने के बाद एक मिनिट के पूर्व ही डिसकार्ड कर दिये जाते है। ठीक है सब के सब नही, लेकिन आपको नजारा तो आ गया हो गया होगा ।
यह प्रक्रिया कितने बार होती है? लगभग हर महिने या साल मे एक बार।
ई-पत्र का मार्ग अपनाईये
कुछ वर्ष पुर्व हम ई-मेल और डेटाबेस की संभावनाओं की तरफ जागृत हुये। खर्च मे बचत की दृष्टीसे पर्याय बहुत ही आकर्षक था । डिजाईन के खर्चे मे भले ही कोई बचत न हुयी हो, लेकिन चपाई तो मुफ्त और डिलेवरीका खर्च ५० पैसे प्रति पत्र । जैसे डाक द्वारा प्रचार के खर्च का अनुमान हमने उपर निकाला, ठीक उसी तरह ई-मेल का अनुमानित व्यय लगभग दस प्रतिशत ही निकलता है। अहो आश्चर्यम् और आपके दिल की धडकन भी तेज नही होती।
खर्च मे बचत के अलावा आपको और अधिक जानकारी मिलने लगी, कितने लोगोने आपका ई-मेल खोला, कितनोंने पत्रमे ग्रंथित कडियों पर क्लिक किया और किसने आपका पत्र खोले बिना खोले, बिना पढे ही इन्बॉक्स से निकाल दिया । अब आप जानते हैं किस-किस का ई-मेल पता गलत है। जिन ग्राहकोने किसी विषय मे रूचि दिखाई है उनसे आप संवाद/सम्पर्क साध सकते हैं। कोई ग्राहक सचमुच आपकी सेवाऒं/उत्पादों मे अगर बिलकुल ही रुचि नही रखता(बन्दर क्या जाने अद्रक का स्वाद) तो आप अपनी मेलिंग लिस्टसे उसे हटा भी सकते हैं।
लेकिन सस्ते तकनीकी उपायों के धडाधड उपयोग करने से अपने आपको बचाईये
तन्त्रज्ञान अच्छा है। लेकिन हम मनष्यों के साथ व्यवहार करते है। अगर आपके पहलेसे भरे हुये इन्बॉक्समे रोज एक रिमाइंडर मै भेजने लगूं तो आपके मन मे मेरे प्रति चीड उत्पन्न होना स्वाभाविक ही है । जितना हो सके ग्राहक को कम से कम तकलीफ हो यह देखना जरूरी है । हॅमरिंग से होने वाला नुकसान तन्त्रज्ञानसे होने वाले फायदे से कही जादा न हो जाये।
क्या कहना है और किसे कहना है यह ज्ञान अत्यावश्यक है
वाणिज्य संचार के मूलभूत तत्त्वों में नये तन्त्रज्ञान से कुछ बदलाव नही आया है. आप किससे सम्पर्क कर रहे हैं और उसकी क्या जरूरत है माद्यम पर नही निर्भर करता। सरल भाषा मे सीधे-सीधे अपनी बात सामने वाले को प्रभावित करती है। लेकिन आजकल अक्सर देखा यह जा रहा है कि जितना घुमाकर संदेश भेजे जा रहे हैं और् जितना पॉश दिखाने की कोशीश की जा रही है, उतनी ही संदेश की परिणामकारकता कम होते जा रही है|
अंग्रजीसे अनुवादित
मई 23, 2009 को 6:18 अपराह्न पर |
Thanks for your initiative and effort in translating my post. So long as you acknowledge the source, I do not have a problem with your translating and re-posting in your site my posts on http://marketingdunia.wordpress.com
My Hindi, I am afraid, is not very good. But, I am sure your did a great job.